हिन्दी महीनों की सुंदर कविता: बारह मासा
प्रथम महीना चैत से गिन।
राम जनम का जिसमें दिन।।
द्वितीय माह आया वैशाख।
वैसाखी पंचनद की साख।।
ज्येष्ठ मास को जान तीसरा।
अब तो जाड़ा सबको बिसरा।।
चौथा मास आया आषाढ़।
नदियों में आती है बाढ़।।
पाँचवें सावन घेरे बदरी।
झूला झूलो गाओ कजरी।।
भादौ मास को जानो छठा।
कृष्ण जन्म की सुन्दर छटा।।
मास सातवाँ लगा कुंआर।
दुर्गा पूजा की आई बहार।।
कार्तिक मास आठवाँ आए।
दीवाली के दीप जलाए।।
नवाँ महीना आया अगहन।
सीता बनी राम की दुल्हन।।
पूस मास है क्रम में दस।
पीओ सब गन्ने का रस।।
ग्यारहवाँ मास माघ को गाओ।
समरसता का भाव जगाओ।।
मास बारहवाँ फाल्गुन आया।
साथ में होली के रंग लाया।।
बारह मास हुए अब पूरे।
छोड़ो न कोई काम अधूरे।।
हिन्दू नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ!...
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