Tuesday, September 26, 2017

Om or Ohm meaning, uses and importance.

*ॐ (OM)  उच्चारण के 11 शारीरिक लाभ* :

ॐ : ओउम् तीन अक्षरों से बना है।
अ उ म् ।
"अ" का अर्थ है उत्पन्न होना,
"उ" का तात्पर्य है उठना, उड़ना अर्थात् विकास,
"म" का मतलब है मौन हो जाना अर्थात् "ब्रह्मलीन" हो जाना।
ॐ सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और पूरी सृष्टि का द्योतक है।
ॐ का उच्चारण शारीरिक लाभ प्रदान करता है।
जानीए
ॐ कैसे है स्वास्थ्यवर्द्धक और अपनाएं आरोग्य के लिए ॐ के उच्चारण का मार्ग...

● *उच्चारण की विधि*

प्रातः उठकर पवित्र होकर ओंकार ध्वनि का उच्चारण करें। ॐ का उच्चारण पद्मासन, अर्धपद्मासन, सुखासन, वज्रासन में बैठकर कर सकते हैं। इसका उच्चारण 5, 7, 10, 21 बार अपने समयानुसार कर सकते हैं। ॐ जोर से बोल सकते हैं, धीरे-धीरे बोल सकते हैं। ॐ जप माला से भी कर सकते हैं।

01)  *ॐ और थायराॅयडः*

ॐ का उच्चारण करने से गले में कंपन पैदा होती है जो थायरायड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।

*02)  *ॐ और घबराहटः-*
अगर आपको घबराहट या अधीरता होती है तो ॐ के उच्चारण से उत्तम कुछ भी नहीं।

*03) *..ॐ और तनावः-*
यह शरीर के विषैले तत्त्वों को दूर करता है, अर्थात तनाव के कारण पैदा होने वाले द्रव्यों पर नियंत्रण करता है।

*04)  *ॐ और खून का प्रवाहः-*
यह हृदय और ख़ून के प्रवाह को संतुलित रखता है।

*5)  ॐ और पाचनः-*

ॐ के उच्चारण से पाचन शक्ति तेज़ होती है।

*06)  ॐ लाए स्फूर्तिः-*
इससे शरीर में फिर से युवावस्था वाली स्फूर्ति का संचार होता है।

*07)  ॐ और थकान:-*
थकान से बचाने के लिए इससे उत्तम उपाय कुछ और नहीं।

*08) .ॐ और नींदः-*
नींद न आने की समस्या इससे कुछ ही समय में दूर हो जाती है। रात को सोते समय नींद आने तक मन में इसको करने से निश्चिंत नींद आएगी।

*09) .ॐ और फेफड़े:-*
कुछ विशेष प्राणायाम के साथ इसे करने से फेफड़ों में मज़बूती आती है।

*10)  ॐ और रीढ़ की हड्डी:-*
ॐ के पहले शब्द का उच्चारण करने से कंपन पैदा होती है। इन कंपन से रीढ़ की हड्डी प्रभावित होती है और इसकी क्षमता बढ़ जाती है।

*11)  ॐ दूर करे तनावः-*
ॐ का उच्चारण करने से पूरा शरीर तनाव-रहित हो जाता है।

आशा है आप अब कुछ समय जरुर ॐ का उच्चारण करेंगे । 

Saturday, September 23, 2017

Tulsi Mata Tulsi Plant

*तुलसी कौन थी?*
```तुलसी(पौधा) पूर्व जन्म मे एक लड़की थी जिस का नाम वृंदा था, राक्षस कुल में उसका जन्म हुआ था बचपन से ही भगवान विष्णु की भक्त थी.बड़े ही प्रेम से भगवान की सेवा, पूजा किया करती थी.जब वह बड़ी हुई तो उनका विवाह राक्षस कुल में दानव राज जलंधर से हो गया। जलंधर समुद्र से उत्पन्न हुआ था.
वृंदा बड़ी ही पतिव्रता स्त्री थी सदा अपने पति की सेवा किया करती थी.
एक बार देवताओ और दानवों में युद्ध हुआ जब जलंधर युद्ध पर जाने लगे तो वृंदा ने कहा``` -
स्वामी आप युद्ध पर जा रहे है आप जब तक युद्ध में रहेगे में पूजा में बैठ कर``` आपकी जीत के लिये अनुष्ठान करुगी,और जब तक आप वापस नहीं आ जाते, मैं अपना संकल्प
नही छोडूगी। जलंधर तो युद्ध में चले गये,और वृंदा व्रत का संकल्प लेकर पूजा में बैठ गयी, उनके व्रत के प्रभाव से देवता भी जलंधर को ना जीत सके, सारे देवता जब हारने लगे तो विष्णु जी के पास गये।
सबने भगवान से प्रार्थना की तो भगवान कहने लगे कि – वृंदा मेरी परम भक्त है में उसके साथ छल नहीं कर सकता ।
फिर देवता बोले - भगवान दूसरा कोई उपाय भी तो नहीं है अब आप ही हमारी मदद कर सकते है।
भगवान ने जलंधर का ही रूप रखा और वृंदा के महल में पँहुच गये जैसे
ही वृंदा ने अपने पति को देखा, वे तुरंत पूजा मे से उठ गई और उनके चरणों को छू लिए,जैसे ही उनका संकल्प टूटा, युद्ध में देवताओ ने जलंधर को मार दिया और उसका सिर काट कर अलग कर दिया,उनका सिर वृंदा के महल में गिरा जब वृंदा ने देखा कि मेरे पति का सिर तो कटा पडा है तो फिर ये जो मेरे सामने खड़े है ये कौन है?
उन्होंने पूँछा - आप कौन हो जिसका स्पर्श मैने किया, तब भगवान अपने रूप में आ गये पर वे कुछ ना बोल सके,वृंदा सारी बात समझ गई, उन्होंने भगवान को श्राप दे दिया आप पत्थर के हो जाओ, और भगवान तुंरत पत्थर के हो गये।
सभी देवता हाहाकार करने लगे लक्ष्मी जी रोने लगे और प्रार्थना करने लगे यब वृंदा जी ने भगवान को वापस वैसा ही कर दिया और अपने पति का सिर लेकर वे
सती हो गयी।
उनकी राख से एक पौधा निकला तब
भगवान विष्णु जी ने कहा –आज से
इनका नाम तुलसी है, और मेरा एक रूप इस पत्थर के रूप में रहेगा जिसे शालिग्राम के नाम से तुलसी जी के साथ ही पूजा जायेगा और में
बिना तुलसी जी के भोग```
```स्वीकार नहीं करुगा। तब से तुलसी जी कि पूजा सभी करने लगे। और तुलसी जी का विवाह शालिग्राम जी के साथ कार्तिक मास में```
```किया जाता है.देव-उठावनी एकादशी के दिन इसे तुलसी विवाह के रूप में मनाया जाता है !

Thursday, September 21, 2017

Shardiya Navratri 2017 Muhurt, Bhog, Samagri , Kanya Pujan

शारदीय नवरात्री 2017

कलश स्थापना मुहूर्त :- 21 सितंबर  2017 दिन गुरूवार

प्रथम मुहूर्त - प्रातः 6:03  से 8:22 तक
द्वितीय मुहूर्त - दोपहर 11:36 से 12 :24 तक

मां का आगमन - डोली पर

9 देवियो कें प्रतिदिन के भोग

प्रथम दिवस - कलशस्थापन  एवं मां शैलपुत्री की पूजा

मुख्य भोग - खीर ।
उपाय - घी का भोग लगाएं और दान करें, बीमारी दूर होगी।

द्वितीय दिवस -  मां ब्राह्मचारिणी की पूजा

मुख्य भोग- खीर, गाय का घी एवं मिश्री ।
उपाय - शक्कर का भोग लगाएं और उसका दान करें, आयु लंबी होती है।

तृतीय दिवस - मां चन्द्रघंटा की पूजा

मुख्य भोग- केला
उपाय - दूध का भोग लगाएं और इसका दान करें, दु:खों से मुक्ति मिलती है ।

चतुर्थ दिवस -  मां कुष्मांडा की पूजा

मुख्य भोग- मखाना ।
उपाय - मालपुए का भोग लगाएं और दान करें, कष्टों से मुक्ति मिलती है।

पंचम दिवस - मां स्कन्दमाता की पूजा

मुख्य भोग- शहद ।
उपाय - गुड़ की चीजों का भोग लगाएं और दान भी करें, गरीबी दूर होती है।

षष्टम दिवस - मां कात्यायनी की पूजा

मुख्य भोग- मिश्री ।
उपाय - केले व शहद का भोग लगाएं व दान करें, परिवार में सुख-शांति रहेगी और धन प्राप्ति के योग बनते हैं।

सप्तम दिवस - मां कालरात्री की पूजा

मुख्य भोग- अंकुरीत चना एवं मूँग ।
उपाय - केले व शहद का भोग लगाएं व दान करें, परिवार में सुख-शांति रहेगी और धन प्राप्ति के योग बनते हैं।

अष्टम दिवस - मां महागौरी की पूजा -

मुख्य भोग - नारियल ।
उपाय - नारियल का भोग लगाएं और दान करें, सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

नवम दिवस - मां सिध्दीदात्री की पूजा -

मुख्य भोग- दही - पेड़ा।
उपाय - अनाजों का भोग लगाएं और दान करें , सुख-शांति मिलती है।

#कन्या_पूजन विधि

कन्या पूजन अष्टमी और नवमी दोनों ही दिन किया जा सकता है । 9 कुँवारी कन्याओं को सादर पुर्वक आमंत्रित करे ।
घर में प्रवेश करते ही कन्याओं के पाँव धोएं और उचित आसन पर बिठाए हाथ में मौली बांधे और माथे पर रोली की बिंदी लगाएं।
उनकी थाली में हलवा-पूरी और चने परोसे।
कन्या पूजन के लिए पूजा की थाली जिसमें दो पूरी और हलवा-चने रख ले और बीच में आटे से बने एक दीपक को शुद्ध घी से जलाएं। कन्या पूजन के बाद सभी कन्याओं को अपनी थाली में से यही प्रसाद खाने को दें। अब कन्याओं को उचित उपहार तथा कुछ राशि भी भेंट में देऔर चरण छुएं और उनके प्रस्थान के बाद स्वयं प्रसाद खाले।

#नवरात्र_पूजा_विसर्जन_विधि -

कन्या पूजन के पश्चात एक पुष्प एवं चावल के कुछ दाने हथेली में लें और संकल्प लें|
कलश में स्थापित नारियल और चढ़ावे के तौर पर सभी फल, मिष्ठान्न आदि को स्वयं भी ग्रहण करें और परिजनों को भी दें| घट के पवित्र जल का पूरे घर में छिडकाव करें और फिर सम्पूर्ण परिवार इसे प्रसाद स्वरुप ग्रहण करें| घट में रखें सिक्कों को अपने गुल्लक में रख सकते हैं, बरकत होती है|
माता की चौकी से सिंहासन को पुनः अपने घर के मंदिर में उनके स्थान पर ही रख दें|
श्रृंगार सामग्री में से साड़ी और जेवरात आदि को घर की महिला सदस्याएं प्रयोग कर सकती हैं| चढ़ावे के तौर पर सभी फल, मिष्ठान्न आदि को भी परिवार में बांटें| चौकी और घट के ढक्कन पर रखें चावल एकत्रित कर पक्षियों को दें| माँ दुर्गे की प्रतिमा अथवा तस्वीर, घट में बोयें गए जौ एवं पूजा सामग्री, सब को प्रणाम करें और समुन्द्, नदी या सरोवर में विसर्जित कर दें| विसर्जन के पश्चात एक नारियल, दक्षिणा और चौकी के कपडें को किसी ब्राह्मण को दान करें|

Shardiya Navratri NavDurga

"जय माता दी"
या देवी सर्व भूतेषु,शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै,नमस्तस्यै नमो नमः।।

1- #शैलपु्त्री

पर्वतराज हिमालय के घर,
                माता ने जन्म लिया है|
शैलापुत्री तब कहलायी,
                सबको ही हर्ष दिया है||
एक हाथ में लिए खड्ग हैं,
                    दूजे कर कमल विराजे,
होकर वृषभ सवार मात फिर,
                   कष्टों को दूर किया हैं||

2- #बम्ह्रचारिणी

योग साधना हुई लीन जब,
                बम्ह्रचारिणी कहलाई|
इसी रूप की सब मुनियों ने,
                भूरि भूरि महिमा गाई||
एक हाथ में लिए कमण्डल,
                 दूजे में जप की माला|
जिसने पूजा इसी रूप को,
                माँ उस पर होत सहाई||

3- #चंद्रघंण्टा

अर्द्धचन्द्र माँ के मस्तिक पर,
                 कंचन जैसी हैं काया|
होते हैं कार्य सिद्ध उनके,
            कर्म वचन से जो ध्याया||
चंद्रघण्टा नाम हैं इनका,
                करती है सिंह सवारी|
दूर करो माँ संकट सारे,
                हमको माँ दे दो छाया||

4- #कूष्माण्ड़ा

मंद मंद मुस्काकर माँ ने,
             पूरा ब्रम्हाण्ड़ बनाया हैं|
नाम पड़ा हैं तब कूष्माण्ड़ा,
               पूर्ण धरा पर छाया हैं||
जाप करे जो इसी नाम का,
             भव सागर तर जाये वो,
सब कुछ देती हैं माँ उसको,
                जो द्वारे पर आया हैं||

5- #स्कन्दमाता

स्वरूप पंचम माँ दुर्ग का,
               उसे स्कन्दमाता मानौ|
विशुद्ध मन को शुद्ध करे जो,
             कार्तिकेय की माँ जानौ||
सिंह सवारी मैया करती,
                कमलासन पर बैठी हैं|
इच्छायें माँ पूरी करदे,
             जो भी  तुम मन में ठानौ||

6- #कात्यायनी
कात्यायन की कठिन तपस्या,
                    प्रसन्न हुई महारानी|
महर्षि इच्छा पूरी करने,
                  आई घर जगत भवानी||
षष्ठ स्वरुप हैं कात्यायनी,
                   सबकी पीड़ा हरती हैं|
मुझको भी माँ दर्शन दे दो,
                   *सतीश* बड़ा  अज्ञानी||

7- #कालरात्रि
रूप भयानक माता का,
            सुफल मनोरथ बाली हैं|
कालरात्रि कहते हैं इनको,
                 संकट हरने बाली हैं ||
सारे भय को दूर करे माँ,
                जीवन में खुशहाली दे|
एक हाथ में तलवार लिए,
                  दूजे विपदा टाली है||

8- #महागौरी

आँठवी दुर्गा महागौरी,
                शंख चन्द्रमा धारी हैं|
तीन नेत्र हैं माता जी के,
           भक्तों पर माँ बलिहारी हैं||
माँ गौरी की पूजा करले,
              पाप सभी धुल जायेगे|
ऊँचे पर्वत पर माँ रहती,
            उसकी महिमा न्यारी हैं||

9- #सिद्धदात्री

अनिमा महिमा गरिमा लघिमा,
              सब सिद्धि देन बाली हैं |
नौवा रूप हैं सिद्धिदात्री,
                    माता शेराबाली हैं||
महाशक्ति की पूजा करले,
               भाग्य उदय हो जायेगा|

Tuesday, September 19, 2017

Shardiya Navratri 2017 MahaSanyog

महासंयोग लेकर आ रहा है इस बार नवरात्रि का पर्व
इस बार नवरात्रि महासंयोग लेकर आ रही है । मां जगदंबा पालकी में बैठकर आएंगी और पालकी में ही बैठकर जाएंगी । नवरत्रि के 9 दिन सुख समृद्धिदायक होंगे। अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से 21 सितम्बर गुरुवार को शारदीय नवरात्र का आरंभ होगा।
शारदीय नवरात्र शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का पर्व 21 सितम्बर से शुरू होकर 29 सितम्बर को समाप्त होगा। इस बार मां दुर्गा का आगमन पालकी से होगा व गमन पालकी पर ही होगा, जो अति शुभ है। देवीपुराण में नवरात्रि में भगवती के आगमन व प्रस्थान के लिए वार अनुसार वाहन बताये इस बार माता का आगमन व गमन जनजीवन के लिए हर प्रकार की सिद्धि देने वाला है।इस बार गुरुवार के दिन हस्त नक्षत्र में घट स्थापना के साथ शक्ति उपासना का पर्व काल शुरु होगा। गुरुवार के दिन हस्त नक्षत्र में यदि देवी आराधना का पर्व शुरू हो, तो यह देवीकृपा व इष्ट साधना के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
देवी भागवत में नवरात्रि के प्रारंभ व समापन के वार अनुसार माताजी के आगमन प्रस्थान के वाहन इस प्रकार बताए गए हैं।
आगमन वाहन
रविवार व सोमवार को हाथी
शनिवार व मंगलवार को घोड़ा
गुरुवार व शुक्रवार को पालकी
बुधवार को नौका आगमन
प्रस्थान वाहन
रविवार व सोमवार भैंसा
शनिवार और मंगलवार को सिंह
बुधवार व शुक्रवार को गज हाथी
गुरुवार को नर वाहन पर प्रस्थान
सर्वार्थसिद्धि योग में मनेगा दशहरा
21 सितम्बर घटस्थापना, गुरुवार व हस्त नक्षत्र योग।
22सितम्बर द्वितीया, रवियोग
23 सितम्बर तृतीया, रवियोग,सर्वार्थसिद्धि
24 सितम्बर चतुर्थी, रवियोग
25 अक्टूबर चतुर्थी, रवियोग, सर्वार्थसिद्धि
26 सितम्बर षष्ठी, रवियोग
27 सितम्बर सप्तमी,रवियोग
28 सितम्बर दुर्गाअष्टमी महापूजा
29 अक्टूबर महानवमी रवियोग
30 सितम्बर विजयादशमी, रवियोग, सर्वार्थसिद्धि योग

Saturday, September 16, 2017

मैं ना होता तो क्या होता...? #HanumanJi #RamJi

*हनुमानजी ने प्रभु श्रीराम से कहा कि मैंने लंका जाकर विभीषण का घर नहीं देखा था, तब तक मुझे लगता था कि लंका में भला संत कहां मिलेंगे ? प्रभू, मैं तो समझता था कि संत सिर्फ भारत में ही होते हैं, लेकिन जब मैं लंका में सीताजी को नही ढूंढ सका और जब विभीषण ने उपाय बताया तो मैंने सोचा कि जिन्हें मैं प्रयत्न करके नहीं ढूंढ सका, उनका पता तो इन लंका वाले संत ने ही बता दिया, शायद प्रभु ने यही दिखाने के लिए भेजा था कि इस दृश्य को भी देख लो !*

*अशोक वाटिका में जिस समय रावण क्रोध में भरकर तलवार लेकर माँ को मारने के लिए दौड़ा, तब मुझे लगा कि इसकी तलवार छीन कर इसका सिर काट लेना चाहिये, किन्तु अगले ही क्षण मैंने देखा कि मंदोदरी ने रावण का हाथ पकड़ लिया, यह देखकर मैं गदगद् हो गया ! ओह प्रभू आपने कैसी शिक्षा दी, यदि मैं कूद पड़ता तो मुझे भ्रम हो जाता कि यदि मैं न होता तो क्या होता ?*

*बहुधा व्यक्ति को ऐसा ही भ्रम हो जाता है, मुझे भी लगता कि यदि मैं न होता तो सीताजी को कौन बचाता ? पर आपने उन्हें बचाया ही नही, बल्कि बचाने का काम रावण की पत्नी को ही सौंप दिया, जिसको इस बात की प्रसन्नता होनी चाहिए कि सीता मरे तो मेरा भय दूर हो, तब मैं समझ गया कि आप जिससे जो कार्य लेना चाहते हैं, वह उसी से लेते हैं, किसी का कोई महत्व नहीं है !*

*आगे चलकर जब त्रिजटा ने कहा कि लंका में बंदर आया हुआ है और वह लंका जलायेगा तो मैं बड़ी चिंता में पड़ गया कि प्रभु ने तो लंका जलाने के लिए कहा ही नहीं है और त्रिजटा कह रही है तो मैं क्या करुं ? पर जब रावण के सैनिक तलवार लेकर मुझे मारने के लिये दौड़े तो मैंने अपने को बचाने की तनिक भी चेष्टा नहीं की, और जब विभीषण ने आकर कहा कि दूत को मारना अनीति है, तो मैं समझ गया कि मुझे बचाने के लिये प्रभु ने यह उपाय कर दिया !*

*आश्चर्य की पराकाष्ठा तो तब हुई, जब रावण ने कहा कि बंदर को मारा नहीं जायेगा पर पूंछ मे कपड़ा लपेट कर घी डालकर आग लगाई जाये तो मैं गदगद् हो गया कि उस लंका वाली संत त्रिजटा की ही बात सच थी, वरना *लंका को जलाने के लिए मैं कहां से घी, तेल, कपड़ा लाता और कहां आग ढूंढता, पर वह प्रबन्ध भी आपने रावण से करा दिया, जब आप रावण से भी अपना काम करा लेते हैं तो मुझसे करा लेने में आश्चर्य की क्या बात है !*

*इसलिये याद रखें, कि संसार मे जो कुछ भी हो रहा है वह सब ईश्वरीय विधान है, हम और आप तो केवल निमित्त मात्र हैं, इसीलिये कभी भी ये भ्रम न पालें कि मैं न होता तो क्या होता...?*

Friday, September 8, 2017

आयुर्वेदिक दोहे ( Ayurvedic Dohe )


१ दही मथें माखन मिले, केसर संग मिलाय,
होठों पर लेपित करें, रंग गुलाबी आय..

२ बहती यदि जो नाक हो, बहुत बुरा हो हाल,
यूकेलिप्टिस तेल लें, सूंघें डाल रुमाल..

३ अजवाइन को पीसिये , गाढ़ा लेप लगाय,
चर्म रोग सब दूर हो, तन कंचन बन जाय..

४ अजवाइन को पीस लें , नीबू संग मिलाय,
फोड़ा-फुंसी दूर हों, सभी बला टल जाय..

५ अजवाइन-गुड़ खाइए, तभी बने कुछ काम,
पित्त रोग में लाभ हो, पायेंगे आराम..

६ ठण्ड लगे जब आपको, सर्दी से बेहाल,
नीबू मधु के साथ में, अदरक पियें उबाल..

७ अदरक का रस लीजिए. मधु लेवें समभाग,
नियमित सेवन जब करें, सर्दी जाए भाग..

८ रोटी मक्के की भली, खा लें यदि भरपूर,
बेहतर लीवर आपका, टी.बी भी हो दूर..

९ गाजर रस संग आँवला, बीस औ चालिस ग्राम,
रक्तचाप हिरदय सही, पायें सब आराम..

१० शहद आंवला जूस हो, मिश्री सब दस ग्राम,
बीस ग्राम घी साथ में, यौवन स्थिर काम..

११ चिंतित होता क्यों भला, देख बुढ़ापा रोय,
चौलाई पालक भली, यौवन स्थिर होय..

१२ लाल टमाटर लीजिए, खीरा सहित सनेह,
जूस करेला साथ हो, दूर रहे मधुमेह..

१३ प्रातः संध्या पीजिए, खाली पेट सनेह,
जामुन-गुठली पीसिये, नहीं रहे मधुमेह..

१४ सात पत्र लें नीम के, खाली पेट चबाय, दूर करे मधुमेह को, सब कुछ मन को भाय..

१५ सात फूल ले लीजिए, सुन्दर सदाबहार,
दूर करे मधुमेह को, जीवन में हो प्यार..

१६ तुलसीदल दस लीजिए, उठकर प्रातःकाल,
सेहत सुधरे आपकी, तन-मन मालामाल..

१७ थोड़ा सा गुड़ लीजिए, दूर रहें सब रोग,
अधिक कभी मत खाइए, चाहे मोहनभोग..

१८ अजवाइन और हींग लें, लहसुन तेल पकाय,
मालिश जोड़ों की करें, दर्द दूर हो जाय..

१९ ऐलोवेरा-आँवला, करे खून में वृद्धि,
उदर व्याधियाँ दूर हों,जीवन में हो सिद्धि..

२० दस्त अगर आने लगें, चिंतित दीखे माथ,
दालचीनि का पाउडर, लें पानी के साथ..

२१ मुँह में बदबू हो अगर, दालचीनि मुख डाल,
बने सुगन्धित मुख, महक, दूर होय तत्काल..

२२ कंचन काया को कभी, पित्त अगर दे कष्ट,
घृतकुमारि संग आँवला, करे उसे भी नष्ट..

२३ बीस मिली रस आँवला, पांच ग्राम मधु संग,
सुबह शाम में चाटिये, बढ़े ज्योति सब दंग..

२४ बीस मिली रस आँवला, हल्दी हो एक ग्राम,
सर्दी कफ तकलीफ में, फ़ौरन हो आराम..

२५ नीबू बेसन जल शहद, मिश्रित लेप लगाय,
चेहरा सुन्दर तब बने, बेहतर यही उपाय..

२६. मधु का सेवन जो करे, सुख पावेगा सोय,
कंठ सुरीला साथ में, वाणी मधुरिम होय..

२७. पीता थोड़ी छाछ जो, भोजन करके रोज,
नहीं जरूरत वैद्य की, चेहरे पर हो ओज..

२८ ठण्ड अगर लग जाय जो नहीं बने कुछ काम, नियमित पी लें गुनगुना, पानी दे आराम..

२९ कफ से पीड़ित हो अगर, खाँसी बहुत सताय,
अजवाइन की भाप लें, कफ तब बाहर आय..

३० अजवाइन लें छाछ संग, मात्रा पाँच गिराम, कीट पेट के नष्ट हों, जल्दी हो आराम..

३१ छाछ हींग सेंधा नमक, दूर करे सब रोग,
जीरा उसमें डालकर, पियें सदा यह भोग..।